आठ भाषाएँ
ऋषिकुल भाषा संस्थान
हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, फ़ारसी, तमिल, पंजाबी, पश्तो और संस्कृत — बरतने के लिए, परीक्षा के लिए नहीं।
हमने यह क्यों आरंभ किया
भारत में भाषा-शिक्षण प्रायः बड़े विश्वविद्यालयों के भीतर रहता है, जहाँ ध्यान संकुचित रूप से पढ़ने-लिखने पर होता है। स्वयं भाषा सीखने वालों के नाते हमें लगा कि लक्ष्मणगढ़ को ऐसी जगह चाहिए जिसका लक्ष्य व्यावहारिक प्रवाह हो — रटे हुए वाक्यों पर नहीं, बल्कि व्याकरण की सच्ची समझ और विस्तृत शब्द-भंडार पर टिका हुआ।
हम कैसे पढ़ाते हैं
शिक्षण विद्यार्थी के अनुसार ढलता है — उसकी रुचि, उसके सीखने का ढंग, और वह भाषा किस काम के लिए चाहिए। पाठ्यक्रम बना हुआ है, पर गति, समय और विषय — सब व्यक्ति के अनुसार बदलते हैं।
कक्षा में व्याकरण, नए शब्द और संवाद-अभ्यास संतुलित रहते हैं। गृहकार्य दिया जाता है। पाठ्यक्रम के अंत में परीक्षा नहीं होती, जब तक विद्यार्थी स्वयं न माँगे; इसके बदले अध्यापक चलते-चलते अनौपचारिक मूल्यांकन करते हैं, और उसी से अगली कक्षा की योजना बनती है।
भाषा सीखना कभी उल्लासपूर्ण होता है और कभी भारी, इसलिए वातावरण एक साथ कठोर और सहज रखने का प्रयत्न रहता है। हम स्वयं से बस एक प्रश्न पूछते हैं — क्या विद्यार्थी सीख रहा है?
कौन आता है
- प्रारंभिक, मध्यम या उन्नत — किसी भी स्तर का कोई भी
- वे जो पुराने ग्रंथ मूल भाषा में पढ़ना चाहते हैं
- भाषा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले
- यूरोपीय भाषा या उर्दू लिपि सीखते भारतीय
- दक्षिण एशिया पर गूढ़ सामग्री पढ़ते शोधार्थी
ऋषिकुल भाषा संस्थान
यहाँ के लोग

Suman Sharmaभाषा अध्यापक 
Puneet Dadheechभाषा अध्यापक 
Anil Vermaभाषा अध्यापक 
Sanjana Sharmaभाषा अध्यापक 
Anita Singhभाषा अध्यापक 
Manju Tiwariभाषा अध्यापक 
Kanchan Guptaभाषा अध्यापक 
Rajendra Sharmaभाषा अध्यापक 
Pooja Vyasभाषा अध्यापक 
Khalid Khatriभाषा अध्यापक
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ऋषिकुल भाषा संस्थान
Next to Main Water Tank, Ramlila GroundLaxmangarh, Sikar, Rajasthan — 332311
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